
बड़ी खबर: धान खरीदी केंद्रों पर किसानों से खुली लूट, ‘अधिक तौल’ का विरोध करने पर दी जा रही उपज वापस ले जाने की धमकी[शहर/जिले का नाम], विशेष संवाददाता।सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन खरीदी केंद्रों पर अन्नदाताओं के साथ शोषण का मामला सामने आया है। कई केंद्रों पर किसानों से तय मात्रा से अधिक धान तौला जा रहा है। जब किसान इसका विरोध करते हैं, तो उन्हें तुलाई बंद करने और अपनी उपज वापस ले जाने की धमकी दी जा रही है।क्या है पूरा मामला?किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर तैनात प्रभारी और कर्मचारी मनमानी पर उतर आए हैं। नियमानुसार, एक कट्टे (बोरे) में तय वजन (जैसे 40 किलो 700 ग्राम) ही लिया जाना चाहिए, लेकिन कई जगहों पर नमी (मॉइस्चर) और सूखत के नाम पर प्रति कट्टा 500 ग्राम से लेकर 1 किलो तक अधिक धान लिया जा रहा है। जब किसान सैकड़ों कट्टे बेचता है, तो यह ‘अधिक तौल’ क्विंटल में बदल जाती है, जिससे उसे हजारों रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है।विरोध करने पर मिलती है धमकीरिपोर्ट के अनुसार, जब जागरूक किसान इस गड़बड़ी को पकड़ते हैं और इसका विरोध करते हैं, तो केंद्र पर मौजूद कर्मचारी और हमाल आक्रामक हो जाते हैं। किसानों को दो टूक जवाब दिया जाता है:”अगर आपको यह तौल मंजूर नहीं है, तो अपना धान वापस ले जाइए या तुलाई रोक दी जाएगी।”चूंकि किसान दूर-दराज के गांवों से भारी भाड़ा खर्च करके ट्रैक्टर-ट्रॉली में उपज लेकर आते हैं, इसलिए वे मजबूरी में इस शोषण को सहने के लिए तैयार हो जाते हैं। उन्हें डर रहता है कि अगर वे वापस गए तो दोबारा परिवहन का खर्च लगेगा और नंबर आने में भी देरी होगी।किसानों की प्रमुख शिकायतें:वजन में हेराफेरी: इलेक्ट्रॉनिक कांटों में गड़बड़ी या जानबूझकर कट्टे में ज्यादा धान भरना।बारदाने का वजन: बारदाने (बोरे) का वजन काटने के बाद भी अतिरिक्त धान की मांग करना।प्रशासन की अनदेखी: शिकायत करने के बावजूद मौके पर अधिकारियों द्वारा सख्त कार्रवाई न करना।प्रशासनिक दावों की खुली पोलभले ही शासन स्तर पर पारदर्शी खरीदी के दावे किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह बता रही है कि समितियों में किसानों का हक मारा जा रहा है। किसानों ने मांग की है कि उड़नदस्ता दल (Flying Squad) तुरंत ऐसे केंद्रों का औचक निरीक्षण करे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि अन्नदाताओं को उनकी उपज का सही दाम मिल सके।






