
मध्य प्रदेश के स्कूलों में वितरित होने वाले मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सरकार बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन ठेकेदारों और व्यवस्था की लापरवाही के कारण बच्चों को ऐसा खाना मिल रहा है जिसे खाना भी मुश्किल है।नीमच जिले की जावद तहसील के चिरमीखेडा गांव से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बच्चों की थालियों में पानी जैसी पतली दाल और कच्ची-जली रोटियां साफ दिखाई दे रही हैं। इस वीडियो ने मध्यान्ह भोजन योजना की हकीकत उजागर कर दी है।यह वीडियो गांव के निवासी रमेश बंजारा ने बनाया और सोशल मीडिया पर अपलोड किया। वीडियो वायरल होने के बाद मध्यान्ह भोजन का ठेका संभाल रहे भगवानपुरा निवासी अमरलाल गुर्जर ने रमेश को धमकाना शुरू कर दिया। इस घटना ने योजना के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।सबसे गंभीर बात यह है कि वीडियो वायरल होने और मामला उजागर होने के बाद भी प्रशासन की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही किस हद तक इस योजना को प्रभावित कर रहे हैं।








