
इंदौर | 14 सितम्बर 2025राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि दुनिया में संघर्ष और टकराव का मुख्य कारण निजी स्वार्थ हैं। उन्होंने कहा कि भारत जब तीन हजार वर्षों तक विश्वगुरु रहा तब वैश्विक स्तर पर कभी कोई संघर्ष नहीं हुआ। यह भारत की संस्कृति और जीवन मूल्यों का ही परिणाम था।भागवत ने ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल की उस भविष्यवाणी का जिक्र भी किया जिसमें कहा गया था कि भारत स्वतंत्र होने के बाद टिक नहीं पाएगा और बंट जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत ने इस भविष्यवाणी को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है। आज भारत मजबूती से एकजुट होकर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है जबकि इंग्लैंड खुद बंटने की स्थिति में आ गया है। उन्होंने कहा कि भारत कभी नहीं बंटेगा और अगर कभी बंटा भी तो हम उसे फिर से जोड़ लेंगे।संघ प्रमुख ने आगे कहा कि मौजूदा समय में दुनिया में जितने भी संघर्ष दिखाई दे रहे हैं उनकी जड़ व्यक्तिगत स्वार्थ ही हैं। इन स्वार्थों ने वैश्विक स्तर पर तमाम समस्याओं को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि भारत आस्था और विश्वास की भूमि है जहां कर्म और तर्क के साथ आस्था का समावेश है।मोहन भागवत ने जीवन को रंगमंच की संज्ञा देते हुए कहा कि हम सब इस रंगमंच पर अभिनेता हैं और हर किसी को अपनी भूमिका निभानी है। असली स्वरूप तब सामने आता है जब जीवन की यह लीला समाप्त हो जाती है।








