
कटनी: धर्मांतरण के चंगुल से मुक्त हुए युवक को नई शुरुआत के लिए मिला ई-रिक्शा; बाल आयोग अध्यक्ष ने कहा- अनाथ आश्रम में धोखे से बदलवाया गया था धर्मकटनी: धर्मांतरण के चंगुल से मुक्त हुए युवक को नई शुरुआत के लिए मिला ई-रिक्शा; बाल आयोग अध्यक्ष ने कहा- अनाथ आश्रम में धोखे से बदलवाया गया था धर्मकटनी: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में धर्मांतरण का शिकार हुए एक युवक के पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए प्रशासन और बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक सराहनीय पहल की है। अनाथ आश्रम में धोखे से धर्म परिवर्तन का शिकार हुए इस युवक को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए ई-रिक्शा भेंट किया गया है।क्या है पूरा मामला?राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उक्त युवक एक अनाथ आश्रम में रहता था। आरोप है कि वहां उसकी मजबूरी और भोलेपन का फायदा उठाकर धोखे से उसका धर्म परिवर्तन करवा दिया गया था।जब यह मामला संज्ञान में आया, तो युवक को वहां से मुक्त कराया गया। अब, जब युवक ने पुनः अपने मूल धर्म में वापसी की है, तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार और जीवनयापन की थी।रोजगार के लिए सौंपा ई-रिक्शायुवक को सम्मानजनक जीवन जीने और अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम के तहत उसे ई-रिक्शा की चाबी सौंपी गई। इस मौके पर बाल आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि धर्मांतरण जैसे षड्यंत्रों से मुक्त होकर लौटे युवाओं का साथ देना समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है।बाल आयोग अध्यक्ष का कड़ा संदेशआयोग के अध्यक्ष ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा:”अनाथ आश्रमों की आड़ में धर्म परिवर्तन का खेल स्वीकार्य नहीं है। ऐसे संस्थानों पर कड़ी नजर रखी जा रही है जो सेवा के नाम पर बच्चों और युवाओं के भविष्य और आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस युवक को ई-रिक्शा देना केवल एक मदद नहीं, बल्कि एक संदेश है कि हम अपने बच्चों के साथ खड़े हैं।”मुख्य बातें:स्थान: कटनी, मध्य प्रदेश।आरोप: अनाथ आश्रम में धोखे से युवक का धर्म बदलवाया गया।कार्रवाई: युवक को मुक्त कराकर उसे रोजगार के लिए ई-रिक्शा दिया गया।उद्देश्य: पीड़ित को आत्मनिर्भर बनाना और समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाना।इस पहल की स्थानीय लोगों द्वारा भी काफी सराहना की जा रही है, जिससे पीड़ित युवक अब एक नई शुरुआत कर सकेगा।








