4 पॉइंट, जिनसे खुला दो भाइयों की हत्या का राज: सुसाइड दिखाने रेलवे ट्रैक पर फेंके शव; 1 आरोपी भाई-भाभी और भतीजी का हत्यारा, दूसरा चाचा को मार चुका

नर्मदापुरम में लापता दो भाइयों के शव अलग-अलग दिन रेलवे ट्रैक पर मिले। एक के सिर को इतनी बेरहमी से कुचला गया था कि पहचानने में काफी मुश्किलें आईं। आरोपियों ने वारदात को आत्महत्या में बदलने के लिए दोनों की बॉडी, मोबाइल और स्कूटी अलग-अलग दिशाओं में फेंके थे।

परिजन ने एक भाई की मौत का पता लगने पर स्टेट हाईवे जाम किया तो हत्या का मास्टरमाइंड ऑटो में बैठकर देखता रहा। उसने झूठी कहानी रचकर पुलिस को भी गुमराह किया, लेकिन अपनी ही कहानी में उसने चार ऐसी बातें बोल दीं, जिससे वह और उसके चार साथी सलाखों के पीछे पहुंच गए।

मुख्य आरोपी इससे पहले अपने भाई-भाभी और भतीजी की हत्या कर चुका है। 20 साल बाद जेल से बाहर आकर इस डबल मर्डर को अंजाम दिया। उसके एक साथी ने भी अपनी चाची से प्रेम के चलते चाचा की हत्या कर दी थी, तब भी उसने हत्या को आत्महत्या में बदलने की कोशिश की थी, हालांकि बच नहीं पाया।

दैनिक भास्कर ने नर्मदापुरम एसपी साई कृष्णा थोटा से केस को सुलझाने की पूरी कहानी को समझा। पढ़िए, रिपोर्

25 किलोमीटर की दूरी पर मिलीं दो भाइयों की लाशें

मनवाड़ा निवासी करण कीर (27) और शुभम कीर (22) चचेरे भाई थे। शुभम गोपाल बिल्डर्स की जेसीबी चलाता था। करण उसी जेसीबी पर हेल्पर का काम करता था। 17 दिसंबर की रात करीब 9:30 बजे दोनों स्कूटी से बैटरी डलवाने का कहकर घर से निकले थे, लेकिन अगले दिन सुबह 10 बजे तक नहीं लौटे। दोनों के मोबाइल भी बंद आए। इसके बाद परिजन ने पुलिस को सूचना दी।

18 दिसंबर को करण कीर की लाश बांसखापा रेलवे फाटक के नजदीक ट्रैक पर मिली थी। सिर बुरी तरह कुचला हुआ था। हाथ पर लिखे नाम और फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर करने से उसकी पहचान हो पाई। 19 दिसंबर को परिजन ने शव नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर तवा पुल के पास रखकर चक्काजाम किया।

18 दिसंबर को करण कीर की लाश बांसखापा रेलवे फाटक के नजदीक ट्रैक पर मिली थी। सिर बुरी तरह कुचला हुआ था। हाथ पर लिखे नाम और फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर करने से उसकी पहचान हो पाई। 19 दिसंबर को परिजन ने शव नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर तवा पुल के पास रखकर चक्काजाम किया।

20 दिसंबर की शाम को शुभम कीर की लाश भी बागड़ा तवा के जंगल में रेलवे ट्रैक के पास मिली। शरीर पर चोटों के निशान थे। दोनों के शव जहां मिले, उन जगहों में 25 किमी का अंतर था।

कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंची पुलिस
मामले में पुलिस ने जांच शुरू की। 19 दिसंबर को पुलिस मनवाड़ा में ही मोहासा रोड पर स्थित ढाबा संचालक केवलराम कीर तक पहुंची। उसने बताया- मैं रात 12 बजे ढाबे पर था, तब 100 मीटर दूर चपालासर-मनवाड़ा तिराहे पर रेत कंपनी के कर्मचारी तीन गाड़ियों से आए थे। उन्होंने शुभम और करण से मारपीट की, फिर अपने साथ ले गए।

इसकी सूचना मिलते ही परिजन ने चक्काजाम किया और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। आंदोलन खत्म हुआ तो पुलिस ने फिर से केवलराम से बात की। पुलिस को पहले और अब की बातों में विरोधाभास नजर आया।

चक्काजाम करने वाले इन लोगों पर केस दर्ज हुआ था
पुलिस ने चक्काजाम में शामिल इंदल पिता घूड़िया कीर, सोलू पिता रामविलास कीर, विनेश पिता तेजराम कीर, दीपक पिता कालूराम कीर, राजू पिता देवचंद कीर, अमरसिंह पिता धोलू धोबी (सभी मनवाड़ा), राजा कीर निमसाड़िया, जित्तू कीर निवासी रजोन, प्रमोद कीर निवासी गुराड़िया मोती और अन्य के विरुद्ध केस दर्ज किया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन में रेत माफिया के लोग भी शामिल थे।

ढाबा संचालक की बातों को पुख्ता करने टीम बनाई
जांच के दौरान पुलिस को ढाबा संचालक केवलराम कीर पर शक हुआ। उसकी बातों को चेक करने एसडीओपी संजू चौहान के नेतृत्व में तीन अलग-अलग टीमें गठित की गईं। इनको माखननगर थाना प्रभारी अनूप उईके, सोहागपुर थाना प्रभारी ऊषा मरावी और सेमरी हरचंद चौकी प्रभारी आकाशदीप पचाया लीड कर रहे थे।

मोबाइल की लोकेशन और सीडीआर से पकड़ा गया झूठhttpsपुलिस ने करण और शुभम के मोबाइल की लोकेशन और सीडीआर निकलवाई। शुभम का मोबाइल रात 10 बजे स्विच ऑफ हुआ था, जबकि केवलराम कीर ने रात 12 बजे शुभम और करण का रेत कंपनी के कर्मचारियों से विवाद होने की बात कही थी।

इस दौरान एक मोबाइल नंबर पहले मनवाड़ा में, कुछ देर बाद बागड़ा तवा और फिर बांसखापा में एक्टिव दिखा। यह नंबर सौरभ इवने का था। सिंगवाड़ा का रहने वाला सौरभ, केवलराम कीर के साले बंटीलाल का बेटा निकला।

सौरभ के मोबाइल से ही रात 1 बजे सिंगवाड़ा के विजय को भी कॉल गया था। पुलिस ने विजय से संपर्क किया। 17-18 दिसंबर की रात सौरभ के कॉल आने का कारण पूछा। उसने बताया कि सौरभ के नंबर से दिनेश उर्फ दिन्नू ने बात की थी। बोला था कि बांसखापा रेलवे फाटक पर जाकर देखो। कोई पड़ा है क्या, लेकिन मैंने अनसुना कर दिया और सो गया।

सख्ती से पूछताछ की तो सामने आ गया सच
इस इनपुट पर केवलराम कीर से दोबारा पूछताछ की तो उसने बताया कि 17 दिसंबर को साला बंटीलाल, बंटी का लड़का सौरभ, भांजा नवल, सास बैजंती और दिनेश उर्फ दिन्नू, उसके घर मनवाड़ा आए थे। रात करीब 9 बजे पत्नी लक्ष्मीबाई का भांजे नवल कीर से विवाद हो गया था।

इसके बाद ऩवल, दिनेश और सौरभ बाइक से धानाबाड़ गांव निकल गए। पीछे से पत्नी लक्ष्मीबाई, बेटी खुशी, नवल की पत्नी दिव्या, साला बंटी और सास बैजंती भी गांव के अमन कीर के ऑटो से धानाबाड़ के लिए निकले।

रात करीब 10 बजे दोस्त अजय कीर उर्फ पोटा, केवलराम कीर के घर आया। कुछ देर बाद शुभम कीर अपने चचेरे भाई करण कीर को लेकर स्कूटी से केवलराम के घर पहुंचा। यहां पुरानी बातों को लेकर केवलराम का दोनों भाइयों से विवाद हो गया।

डंडे से सिर पर मारा, बेरहमी से पिटाई की
अजय ने तत्काल नवल को कॉल कर बताया कि केवलराम का शुभम और करण से झगड़ा हो गया है। उधर, शुभम ने भी किसी को कॉल करने के लिए फोन निकाला। इसी दौरान केवलराम ने पीछे से शुभम के सिर पर डंडा मार दिया। शुभम जमीन पर गिर गया। ये देखकर करण वहां से भागा।

इसी बीच नवल, दिनेश और सौरभ भी आ गए। सभी ने करण को पकड़ लिया। उसे मारा-पीटा। बेरहमी से मारपीट के चलते शुभम और करण बेहोश हो गए।

शरीर में हलचल होने पर बका मारकर हत्या की
इसके बाद नवल, माखननगर पहुंचा और ऑटो लेकर आ गया। सबने मिलकर करण और शुभम को ऑटो में डाल दिया। शुभम के मोबाइल और स्कूटी को मोहासा औद्योगिक क्षेत्र में छोड़ दिया। इसके बाद बागड़ा तवा में रेलवे ट्रैक के पास पहुंचे। शुभम को रेलवे ट्रैक पर पटक दिया। उसके शरीर में हलचल हुई तो नवल और दिनेश ने बका मारकर उसकी हत्या कर दी।

इसके बाद वे करण को ऑटो से उतारकर ट्रैक पर फेंकने ही वाले थे कि गश्त कर रहे रेलकर्मियों की टॉर्च चमचमाती दिखी। उन्होंने करण को वहां फेंकने का प्लान कैंसिल किया और जंगल के रास्ते से होते हुए 25 किमी दूर बांसखापा की तरफ ले गए।

यहां करण को ट्रैक पर फेंक दिया, जिससे लगे कि उसने सुसाइड किया है। ऐसा कर वे दोनों भाइयों की हत्या की गुत्थी को उलझाना चाहते थे। शव फेंकने के बाद आरोपियों ने सोहागपुर के एक ढाबे पर तड़के 4-5 बजे मछली पार्टी की थी।

दिनेश और केवलराम पहले अपने ही लोगों की हत्या कर चुके

हत्या कर सुसाइड बताने का अनुभवी है दिनेश
दिनेश उर्फ दिन्नू इवने को हत्या की वारदात को आत्महत्या बताने का अनुभव है। उसने 10 साल पहले अपने चाचा देवी सिंह इवने की इसी प्रकार हत्या की थी। दिनेश उर्फ दिन्नू का अपनी चाची शकुनबाई से प्रेम संबंध था।

देवी सिंह ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया था, तब दिनेश और शकुनबाई ने रस्सी से गला घोंटकर देवी सिंह की हत्या कर दी थी। उसके बाद देवी सिंह के शव को पेड़ से लटका दिया था। पुलिस को बताया कि देवी सिंह ने आत्महत्या की है।

लेकिन पुलिस जांच में खुलासा हो गया था कि देवी सिंह ने आत्महत्या नहीं की बल्कि उसकी हत्या की गई है। मामले में शकुनबाई और दिनेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। दिनेश जमानत पर बाहर आ गया था।

भाई-भाभी और भतीजी का हत्यारा है केवलराम
शुभम और करण की हत्या के मुख्य आरोपी केवलराम कीर (45) के खिलाफ 9 अपराध दर्ज हैं। इनमें हत्या और मारपीट के केस भी हैं। वह मूल रूप से रजौन गांव का रहने वाला है। उसके खिलाफ सबसे पहला केस 11 मई 2000 को हत्या, हत्या के प्रयास का दर्ज हुआ था। केवलराम ने अपने भाई, भाभी और भतीजी की हत्या की थी।

केवलराम को 20 साल की सजा हुई थी। सजा पूरी कर वह जेल से बाहर आया था। इसके बाद उसने रजौन की जमीन बेचकर मोहासा मेन रोड पर मनवाड़ा में खेत खरीदा। इसमें मकान बनाया। लक्ष्मीबाई इवने से शादी के बाद वो मोहासा में ही रहने लगा। मकान के बाजू में ही उसने ढाबा खोल रखा था।

केवलराम कीर अवैध शराब का कारोबार भी करता था। उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के केस भी दर्ज हैं।

परिजन बोले- हत्यारों को दर्दनाक मौत मिले
शुभम और करण के घर में मातम छाया है। परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। मां का कहना है कि जिस प्रकार से मेरे बेटे को मारा, उससे ज्यादा दर्दनाक मौत उन हत्यारों को मिले। वहीं, बहन ने कहा- हत्यारों को फांसी की सजा देना चाहिए, ताकि शुभम और करण की आत्मा को शांति मिल सकें।

  • विकास रोहरा

    माधव नगर केरन लाइन डायमंड स्कूल के पीछे 215 कटनी मध्य प्रदेश मो.नं - 74154 51393

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