
उत्तराखंड: कड़ाके की ठंड में धधक रहे हैं पहाड़, सर्दियों में जंगलों में लगी आग ने बढ़ाई चिंतादेहरादून/ऋषिकेश: उत्तराखंड में एक हैरान करने वाली और चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। आमतौर पर जहाँ दिसंबर का महीना पहाड़ों पर बर्फबारी और बारिश लेकर आता है, वहीं इस बार राज्य के जंगल भयंकर आग (Forest Fire) की चपेट में हैं। ताज़ा ख़बरों के मुताबिक, राज्य में पिछले कुछ घंटों में ही 16 अलग-अलग जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं, जो सर्दियों के मौसम में बेहद असामान्य है।क्या है ताज़ा स्थिति?सर्दियों के बीच जंगलों का इस तरह जलना प्रशासन और पर्यावरणविदों के लिए बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।16 जगहों पर आग: वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में 16 स्थानों पर आग धधक रही है।प्रभावित इलाके: टिहरी गढ़वाल, बागेश्वर (जिजोली क्षेत्र) और ऋषिकेश के आसपास के पहाड़ी इलाकों से आग की लपटें दिखाई दे रही हैं। टिहरी के गजा क्षेत्र में ‘माणदा तोली डांडा’ से लेकर ‘दुवाकोटी सड़क’ तक का बड़ा वन क्षेत्र आग की चपेट में है।रिहायशी इलाकों को खतरा: कई जगहों पर आग गाँवों के बेहद करीब पहुँच गई है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। धुआं इतना ज्यादा है कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आँखों में जलन महसूस हो रही है।सर्दियों में आग लगने की बड़ी वजहें (Why Winter Fires?)आमतौर पर गर्मियों (मई-जून) में जंगलों में आग लगती है, लेकिन दिसंबर में ऐसी घटनाओं के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं:सूखी सर्दियाँ (Dry Winter): इस साल दिसंबर में अब तक न के बराबर बारिश और बर्फबारी हुई है। नमी की कमी के कारण जंगल पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे छोटी सी चिंगारी भी विकराल रूप ले रही है।क्लाइमेट चेंज (Climate Change): मौसम का बदलता मिज़ाज इसका सबसे बड़ा कारण है। पहाड़ों में तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है और बारिश का पैटर्न बिगड़ गया है।मानवीय भूल: कई बार ग्रामीण सूखी घास हटाने या खेतों को साफ़ करने के लिए आग लगाते हैं, जो सूखी हवाओं के कारण बेकाबू होकर पूरे जंगल में फ़ैल जाती है।भारी नुकसान और प्रशासन की तैयारीइस ‘विंटर फॉरेस्ट फायर’ से वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है। कीमती पेड़-पौधे जलकर खाक हो रहे हैं और जंगली जानवरों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।प्रशासन की कार्रवाई: वन विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। आग बुझाने के लिए वन कर्मियों की टीमें तैनात की गई हैं, लेकिन विषम भौगोलिक परिस्थितियों और पानी की कमी के कारण आग पर काबू पाने में मुश्किलें आ रही हैं।लोगों से अपील: प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे जंगलों के आसपास बीड़ी-सिगरेट न फेंकें और खेतों में आग जलाते समय विशेष सावधानी बरतें।निष्कर्ष:उत्तराखंड के जंगलों में लगी यह आग सिर्फ़ एक घटना नहीं, बल्कि पर्यावरण में आ रहे गंभीर बदलावों की चेतावनी है। अगर जल्द ही बारिश नहीं हुई या आग पर काबू नहीं पाया गया, तो पहाड़ों की खूबसूरती और यहाँ का इकोसिस्टम दोनों को बड़ा झटका लग सकता है।








