
कटनी: बड़वारा को ‘नगर परिषद’ बनाने की मांग तेज, समाजसेवियों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापनकटनी/बड़वारा:कटनी जिले की बड़वारा तहसील को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और यहाँ बढ़ती आबादी को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इसे ‘नगर परिषद’ (City Council) का दर्जा देने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इसी क्रम में स्थानीय समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है।क्या है मुख्य मांग?ज्ञापन सौंपने पहुंचे समाजसेवियों का कहना है कि बड़वारा को तहसील का दर्जा मिले लंबा समय बीत चुका है, लेकिन प्रशासनिक रूप से यह अभी भी ‘ग्राम पंचायत’ ही बना हुआ है। तहसील मुख्यालय होने के कारण यहाँ आसपास के सैकड़ों गांवों के लोग अपने कार्यों के लिए आते हैं, जिससे यहाँ का रसूख और आबादी दोनों एक कस्बाई शहर जैसे हो गए हैं। बावजूद इसके, ग्राम पंचायत का बजट कम होने के कारण यहाँ शहर जैसी सुविधाएं विकसित नहीं हो पा रही हैं।नगर परिषद बनने से क्या होगा लाभ?समाजसेवियों ने ज्ञापन में तर्क दिया है कि बड़वारा को नगर परिषद बनाने से निम्नलिखित लाभ होंगे:विकास कार्यों में तेजी: नगर परिषद बनने पर राज्य सरकार से शहरी विकास के लिए अलग से बजट आवंटित होगा।बुनियादी सुविधाएं: साफ-सफाई, पक्की सड़कें, नालियां, स्ट्रीट लाइट्स और पेयजल की व्यवस्था सुदृढ़ होगी।संसाधन: फायर ब्रिगेड और कचरा प्रबंधन जैसी आधुनिक मशीनरी उपलब्ध हो सकेगी।व्यापारिक विस्तार: क्षेत्र का शहरीकरण होने से स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।प्रशासनिक विसंगति पर सवालस्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में कई ऐसे स्थान हैं जो बड़वारा से आबादी और क्षेत्रफल में छोटे हैं, फिर भी उन्हें नगर परिषद का दर्जा प्राप्त है। जबकि बड़वारा एक महत्वपूर्ण तहसील मुख्यालय, बड़ा व्यावसायिक केंद्र और राजनीतिक रूप से सक्रिय क्षेत्र होने के बाद भी उपेक्षा का शिकार है।ज्ञापन सौंपते समय की स्थितिनायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी मौजूद रहे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द कैबिनेट की बैठक में लाया जाए और बड़वारा को उसका उचित दर्जा दिया जाए।चेतावनीसमाजसेवियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा इस जायज मांग पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में वे चरणबद्ध आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।








