सुबह करीब 6 बजे मम्मी के पास भैया का फोन आया। वह कह रहा था, कल असाइनमेंट जमा करने जाऊंगा। मां और भाई की बातें सुनकर मेरी भी नींद खुल गई। भैया मां से कह रहे थे कि मुझे थार दिला दो। इसके 10 मिनट बाद वह खाई में गिर गया।
इतना कहते हुए सुजल कन्नौज (26) की बहन नीलम फफकने लगती है। सुजल मंगलवार सुबह मंडलेश्वर के जामगेट की दो हजार फीट गहरी खाई में गिर गया था। इससे पहले, रातभर दोस्तों के साथ पार्टी की। सुबह दोस्त की थार लेकर घूमने के लिए जामगेट पहुंच गया। करीब 6 घंटे बाद खाई में उतर कर शव को ऊपर लाया जा सका। सुजल इंदौर के प्राइवेट कॉलेज में एमटेक का छात्र था।”

कंपकंपाती आवाज में सुजल के पिता मड़ेसिंह ने कहा, मैं सरकारी स्कूल में टीचर हूं। दो बेटे और दो बेटियां हैं। सुजल सबसे छोटा था। इंदौर के इंजीनियरिंग कॉलेज से एमटेक कर रहा था। रविवार को ही उसके प्रोफेसर का फोन आया था। असाइनमेंट जमा करने बुलाया था। शाम को वह इंदौर निकल गया। हादसे से थोड़ी देर पहले उसने अपनी मां से बात की थी। लेकिन, फोन उसने किसी दोस्त के नंबर से किया था।
बड़ा बेटा भी इंजीनियर है। पहले उसके दोस्त ने हादसे के बारे में बताया। हम लोग जिस हालत में थे, घर से निकल गए। अब मैं क्या कहूं। सब कुछ खत्म सा हो गया है।
मां से कहा था- मुझे थार दिला दो
मां के साथ कार में बैठी सुजल की बहन नीलम कहती हैं- सोमवार की सुबह के 6 बज रहे थे। जब भैया का फोन आया था। वो कह रहा था, मम्मी कल असाइनमेंट जमा करने जाऊंगा। मम्मी ने कहा कि अभी तू कहां है, अपने कमरे में ही रहना। मैं भी जाग सी गई थी। भैया मम्मी से कह रहे थे कि मुझे थार दिला दो, मुझे थार चाहिए।
इधर, मां संगीता भी बेटे से हुई बात का समय मोबाइल में देख रही हैं। उनका चेहरा पथरा सा गया है। कहना कुछ चाहती हैं, पर सही से बात तक नहीं कर पा रहीं। जैसे-तैसे पूछने पर वे कहती हैं, उसको तो मैंने असाइनमेंट के लिए फाइल खरीदने के पैसे दिए थे। मेरे भाई का लड़का भी उसके साथ था। आज से पहले उसने कभी कार की बात नहीं की। वो अपने दोस्त के साथ थार से ही गया था, इसलिए शायद उसने थार लेने के बात कही।

घटना के वक्त सुजल का दोस्त लोकेश सिंह भी मौजूद था। लोकेश खुद सुजल को बचाने की कोशिश में गिर गया था। उसे भी चोट आई है। उसने इंदौर से ही नर्सिंग कम्पलीट की है। वर्तमान में होम केयर कर रहा है।
बात करते हुए लोकेश के पैर कांप रहे हैं। वह कहता है, बंदर को बिस्किट खिलाते वक्त सुजल का पैर फिसल गया। वो मेरे सामने पहाड़ी से गिरा था। नीचे गिरता देख मैंने उसे बचाने के लिए छंलाग लगाई। लेकिन, 20 फीट की गहराई पर जाकर अटक गया।
मेरी चीख निकल गई। आवाज सुनकर विजय मुजाल्दा और मंसाराम सोलंकी आए। दोनों ने सुजल के बारे में पूछा। मेरी तो आवाज ही नहीं निकल रही थी। इशारे से सुजल के बारे में बताया। इसके बाद पुलिस मुझे बड़गोंदा अस्पताल लेकर आई। मेरे पैर और घुटने छिल गए थे। होंठ में भी दांत लग गए थे, जिससे ब्लड आ गया था। डॉक्टर ने प्राथमिक इलाज किया फिर में भी वापस घटना स्थल पर आ गया।
रात में पार्टी, फिर सुबह घूमने गए
लोकेश ने बताया कि रात में पार्टी की थी। पहले सभी ने मिलकर चिकन और रोटियां बनाईं। फिर रात 11 बजे से पार्टी शुरू हुई। देर रात 3 बजे के करीब खाना खाया।
इसके बाद सुजल ने कहा कि घूमने जाना है। कार का इंतजाम करो। मैंने अपने दोस्त विजय मुजाल्दा को रूम पर बुलाया। भोलाराम गुरुद्वारा के पास किराए की गाड़ी लेने गया, लेकिन गाड़ी नहीं मिली। फोन लगाकर मंसाराम से गाड़ी मांगी, तो उसने मना कर दिया। हम लोग उसके घर पहुंच गए। सुजल, विजय साथ थे। यहां से उसकी थार लेकर सुबह करीब 4 बजे निकल पड़े।
चाणक्यपुरी चौराहा क्रॉस करते ही सुजल ने कहा कि राउ सर्कल की ओर गाड़ी मोड़ लो। सुबह करीब 6 बजे जाम रोड पहुंच गए।
जाम गेट से सुजल ने अपनी मम्मी से फोन पर बात की। वो मां से कह रहा था कि 1 जनवरी को थार लूंगा
मां से बात करने के बाद गेट के पास की दुकान पर सुजल ने तीन प्लेट मैगी ऑर्डर की। सुजल ने बंदरों को खिलाने के लिए दो पैकेट बिस्किट के लिए। बिस्किट और मैगी की प्लेट लेकर हम बंदरों के पास चल दिए।
मां से बात करने के बाद गेट के पास की दुकान पर सुजल ने तीन प्लेट मैगी ऑर्डर की। सुजल ने बंदरों को खिलाने के लिए दो पैकेट बिस्किट के लिए। बिस्किट और मैगी की प्लेट लेकर हम बंदरों के पास चल दिए।
मंसाराम और विजय अपनी प्लेट लिए पीछे आ रहे थे।
बात करते-करते सुजल पहाड़ी के नजदीक से बंदरों को बिस्किट डालने लगा। मंसाराम और विजय पीछे ही रुक गए। मैंने उसे गिरते देखा, उसे बचाने मैं भी कूद गया।

घटनास्थल पर ही सुजल के साथ गए दोस्त मंसाराम मिले। वह इंदौर जिला कोर्ट में एडवोकेट हैं। बात करते हुए उनकी जुबान लड़खड़ा रही है। वह कहते हैं- कुछ समझ नहीं आ रहा, क्या हो गया। हम और विजय तो उसके पीछे चलते-चलते मैगी खा रहे थे
आगे-आगे चल रहे सुजल और लोकेश दिखाई नहीं दिए। कुछ समझ नहीं आ रहा था। हमें लोकेश की आवाज आई। उसको नीचे से ऊपर लेकर आए, फिर पुलिस को फोन लगाया।
6 घंटे लगे लाश ऊपर लाने में
जाम गेट के सुरक्षा कर्मी जितेंद्र बारिया पटेल बताते हैं कि मेरे पास सुबह 6:15 बजे फोन आया था। घाट से ये जो नजारा दिखता है, उतना ही नीचे खतरनाक है। वो करीब 2000 फीट नीचे गिरा था। नीचे जाने में ही दो ढाई घंटे का समय लग जाता है। नीचे चट्टानों वाला घना जंगल है। खाई और नदी भी है। इन सबको पार करने के बाद घाट के नीचे पहुंचना होता है। घाट पर जब गाड़ियां निकलती हैं, तो नीचे पत्थर गिरते हैं।
हम 20 लोग दूसरी पहाड़ी से होते हुए दो-तीन घंटे में नीचे पहुंचे। वहां मोबाइल नेटवर्क भी नहीं मिलता। ऊपर से नीचे या नीचे से ऊपर आवाज लगाने पर ही मैसेज मिल पाता है।
जब हम नीचे पहुंचे तो सुजल की सांस चल रही थी। हमने उसका शरीर हिलाया। इसी दौरान सांस थम गई। फिर हम उसे कंबल में लपेटकर तीन घंटे में ऊपर लेकर आए। उसे मंडलेश्वर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”

जहां हादसा हुआ, वहां फेंसिंग नहीं
जाम गेट जनपद पंचायत महेश्वर की ग्राम पंचायत बागदरा के अधीन आता है। यह इलाका खतरनाक पत्थरों और गहरी खाई के लिए जाना जाता है। यहां तैनात सुरक्षा गार्डों और स्थानीय लोगों द्वारा समझाने के बावजूद, युवा अकसर खतरनाक किनारों पर चढ़कर सेल्फी लेने का जोखिम उठाते हैं। यहां न तो कोई सुरक्षा गार्ड है और न ही जानलेवा खाई के किनारे फेंसिंग।
रात में भी लोग पार्टी करने आते हैं यहां
जाम गेट पर मौजूद लोगों ने बताया कि जिस जगह हादसा हुआ, वह जाम गेट से महज महू मार्ग की ओर 100 मीटर की दूर है। यहां दिन में अस्थाई दुकान लग जाती हैं। यहां आने वाले लोग सेल्फी लेते रहते हैं। जाम गेट पर ज्यादातर इंदौर के युवक-युवतियां रात में पार्टी करने और रील बनाने भी आते रहते हैं। सुबह 9 से रात 9 बजे तक पंचायत का सुरक्षा कर्मी रहता है या मण्डलेश्वर / बड़गोंदा, महू के थाने से जवान रहता है। यही नहीं, रात में भी यहां लोग पार्टी करने आते हैं। उस वक्त कोई गार्ड नहीं रहता। यहां एक ओर ऊंचा पहाड़ है, तो दूसरी तरफ गहरी खाई।
जाम गेट विंध्याचल पर्वतमाला पर स्थित पर्यटक स्थल
जाम गेट महेश्वर तहसील में विंध्याचल पर्वतमाला पर स्थित एक पर्यटन स्थल है। यह महू-मंडलेश्वर रोड (अब खरगोन-इंदौर राज्य राजमार्ग क्रमांक-1) पर है। यह महू से लगभग 30 किमी, इंदौर से 50 किमी, महेश्वर से 33 किमी और जिला मुख्यालय खरगोन से 75 किमी दूर है। जाम दरवाजा मालवा-निमाड़ का प्रवेश द्वार है।
मालवा और निमाड़ की सीमा पर बसे जाम गांव में इस ऐतिहासिक दरवाजे का निर्माण अहिल्या बाई होलकर ने 1791 में कराया था। गांव के नाम से ही इस दरवाजे का नाम जाम दरवाजा रखा गया।







