
हालांकि पुलिस समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती रहती है, फिर भी इस तरह की घटनाओं में कमी नहीं आई है। जबलपुर में साइबर जालसाजों ने तकनीक और सरकारी एजेंसियों की पहचान का दुरुपयोग करते हुए दो करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की है। ये ठग पुलिस, एटीएस और कस्टम अधिकारी बनकर घंटों तक डिजिटल अरेस्ट करते हैं और ठगी को अंजाम देते हैं।
ऐसे फंसाते है साइबर ठग
साइबर ठग सबसे पहले पीड़ित को कॉल करते हैं और कहते हैं कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या आतंकी नेटवर्क के पैसों में शामिल है। इसके बाद वे वीडियो कॉल के जरिए खुद को अधिकारी बताकर अपना ऑफिस दिखाते हैं। वर्दी देखकर पीड़ित डर जाता है और डिजिटल अरेस्ट यानी मोबाइल चालू रखकर लगातार कैमरे के सामने रहना—का पालन करने लगता है।
पीड़ितों को धमकी दी जाती है कि अगर वे आदेश नहीं मानेंगे तो धोखाधड़ी या आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इतना ही नहीं, परिवार को भी गिरफ्तार करने की धमकी दी जाती है। डर के चलते पीड़ित कई बार अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं।
हाल की जबलुपर में हुई घटनाएं
• रांझी में एक बुजुर्ग को लगातार पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। इस दौरान उन्हें बैंक जाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा गया और 76 लाख रुपए ठग लिए गए। पीड़ित ने बाद में क्राइम ब्रांच और साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
• एमपीईबी में पदस्थ 72 वर्षीय रिटायर्ड अधिकारी और उनकी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट के जरिए डराया गया और उनसे 31 लाख रुपए की ठगी हुई। आरोपियों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताते हुए आतंकवाद से जोड़कर भय उत्पन्न किया। मदन महल थाना पुलिस ने धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
• चेरीताल में रहने वाले 70 वर्षीय बुजुर्ग के साथ मुंबई क्राइम ब्रांच के डीसीपी बनकर 45 लाख रुपए की ठगी की गई। आरोपियों ने मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाते हुए 24 घंटे तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा। बुजुर्ग ने आरटीजीएस के जरिए पैसे ट्रांसफर किए। घटना के बाद उन्होंने स्टेट साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने कहा- सक्रिय रहे
साइबर ठगों के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन अधिकांश कॉल और वीडियो चैट विदेशी सर्वर और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से की जा रही हैं, जिससे जांच कठिन हो रही है।
एएसपी जितेंद्र सिंह का कहना है कि साइबर ठग हर दिन नई तकनीक और तरीकों से ठगी कर रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट, टेलीग्राम इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रिटायर्ड बुजुर्ग इन जालसाजों के झांसे में आसानी से आ जाते है
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी ऐसा इन्वेस्टमेंट न करें जो चंद दिनों में पैसा दोगुना करने का दावा करे। कोई भी पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी की धमकी नहीं देता। किसी भी अनजान कॉल या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत नजदीकी थाने में दें।






