
हाईकोर्ट से नकली आयुर्वेदिक दवा बनाने वालों को झटका, FIR निरस्त करने की याचिका खारिजग्वालियर। बिना वैध लाइसेंस के नकली आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने और बेचने के आरोपी व्यक्तियों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से कोई राहत नहीं मिली है। एकलपीठ ने आरोपियों की एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।कोर्ट ने याचिका ठुकराते हुए कहा कि पुलिस द्वारा दर्ज किया गया अपराध प्रथम दृष्टया संज्ञेय (Cognizable) है और इस मामले में पुलिस की जांच पूरी तरह से वैध है।क्या था पूरा मामला?दरअसल, थाना जनकगंज पुलिस को लंबे समय से अपने क्षेत्र में बिना वैध लाइसेंस के नकली आयुर्वेदिक दवाइयां बनाए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम बनाकर छापामार कार्रवाई की।छापामार कार्रवाई में पुलिस ने भारत सिंह कुशवाह, संतोष कुशवाह और विशाल सांखला द्वारा संचालित शिवम् फार्मेसी (लक्ष्मीगंज, जनकगंज) के परिसर से बड़ी मात्रा में नकली आयुर्वेदिक औषधियां बरामद कीं।मरीजों की जान खतरे में डालने का गंभीर अपराध:बरामद की गई दवाइयों में “एडवांस ग्रोथ पाउडर”, “हाजमा चूर्ण हेल्थ बूटी” और “एक्टिव बॉडी ग्रोथ प्रोटीन पाउडर” जैसी चीजें शामिल थीं। जांच में पाया गया कि ये सभी दवाइयां बिना किसी वैध लाइसेंस, फर्म का नाम, पता या बैच नंबर अंकित किए तैयार की जा रही थीं। पुलिस ने इसे मरीजों की जान को खतरे में डालने का गंभीर अपराध माना।कार्रवाई के दौरान, मौके पर आयुष अधिकारी मंगल सिंह यादव को बुलाया गया, जिनकी उपस्थिति में दवाइयों के नमूने लिए गए और शेष माल जब्त कर लिया गया। आरोपियों के पास ड्रग कंट्रोलर, भोपाल से जारी वैध औषधि निर्माण लाइसेंस भी नहीं मिला।पुलिस ने यह अपराध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम और कॉपीराइट एक्ट के तहत दर्ज किया। जांच के दौरान, आरोपी विशाल सांखला ने यह भी स्वीकार किया कि वह भारत सिंह कुशवाह और संतोष कुशवाह द्वारा बनाई गई इन नकली दवाइयों को शहर के विभिन्न मेडिकल स्टोर्स पर सप्लाई करता था।(सोर्स: उपरोक्त खबर पर आधारित)








