
सतना: MP में चला बुलडोजर, 25 हेक्टेयर वनभूमि मुक्त; आदिवासियों के आशियाने उजड़े, बाबाओं को ‘कानूनी’ कब्जे पर सवालसतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के वन परिक्षेत्र सिंहपुर में वन विभाग ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 हेक्टेयर वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। विभाग ने बीट शिवराजपुर और मोरा में यह कार्रवाई की।एक ओर जहां इस कार्रवाई में गरीब और आदिवासी वर्ग के परिवारों के आशियाने बुलडोजर से मिटा दिए गए, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की इस कार्रवाई पर दोहरी नीति अपनाने के गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रशासन गरीबों के कब्जों पर सख्त है, लेकिन उन्हीं जंगलों की सैकड़ों एकड़ भूमि तथाकथित बाबाओं और धार्मिक संस्थाओं को ‘सामुदायिक पट्टों’ के नाम पर ‘कानूनी कब्जा’ दे रहा है।कार्रवाई का विवरण:वन परिक्षेत्राधिकारी नितेश कुमार गंगेले के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने यह कार्रवाई की। * शिवराजपुर बीट (कक्ष क्र. पी-265): यहाँ कुल 8.00 हेक्टेयर भूमि से अतिक्रमण हटाया गया। अतिक्रमणकारियों में रामभगत यादव (4.00 हे.), कामता उर्फ नत्थू यादव (2.00 हे.), अन्नू यादव (1.00 हे.), अशोक यादव (0.50 हे.) और संदीप यादव (0.50 हे.) शामिल थे। * मोरा बीट (कक्ष क्र. पी-253): यहाँ 17.00 हेक्टेयर भूमि से कब्जा हटाया गया। अतिक्रमण करने वालों में जगलाल गोंड (4.00 हे.), रामू गोंड (4.00 हे.), चिंतामणि पाल (3.00 हे.), बबलू पाल (3.00 हे.) और सोनेलाल पाल (3.00 हे.) के नाम सामने आए हैं।विभाग ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के बाद भूमि की गहरी खुदाई कर उसे दोबारा सुरक्षित किया गया है।आदिवासियों की बेघर कहानी और दोहरी नीति पर सवाल:कार्रवाई में जिन परिवारों के आशियाने उजड़े, वे अधिकतर आदिवासी और मजदूर वर्ग से ताल्लुक रखते हैं और वर्षों से इन स्थानों पर झोपड़ी बनाकर या खेती करके जीवन-यापन कर रहे थे। अब वे बेघर हो गए हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि “गरीबों पर बुलडोज़र चलता है, लेकिन बाबाओं और प्रभावशाली लोगों के सैकड़ों एकड़ के कब्जों पर विभाग चुप रहता है।” सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि इसी परिक्षेत्र में कुछ धार्मिक संस्थाओं और आश्रमों को सामुदायिक उपयोग के नाम पर 100 से अधिक एकड़ वनभूमि पट्टे पर दी गई है। उनका आरोप है कि वन संरक्षण के नाम पर सरकार दोहरा रवैया अपना रही है, एक तरफ गरीब आदिवासी परिवारों को हटाया जा रहा है, दूसरी तरफ बाबाओं को वनभूमि पर ‘कानूनी कब्जा’ दिया जा रहा है, जो न्याय की समानता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।(सोर्स: उपरोक्त खबर पर आधारित)








