
डॉ. मोहन भागवत ने सतना में किया बाबा मेहर शाह दरबार के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण, कहा: ‘हम सब एक हैं, सभी सनातनी और हिंदू हैं’सतना, 5 अक्टूबर 2025: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आज सतना के सिंधी कैंप स्थित बाबा मेहर शाह दरबार के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए एकता और सांस्कृतिक अस्मिता पर जोर दिया, तथा दरबार को गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक बताया।एकता पर बल और ‘टूटे दर्पण’ का जिक्रडॉ. भागवत ने अपने उद्बोधन में कहा, “हम सब एक हैं, सभी सनातनी और हिंदू हैं।” उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि एक अंग्रेज ने हमें “टूटा हुआ दर्पण” दिखाकर अलग-अलग कर दिया था। उन्होंने आह्वान किया कि आज हमें अच्छे दर्पण में देखकर एक होने की आवश्यकता है। उन्होंने सिंधी समाज को अपना ही अंग बताते हुए कहा, “सिंधी समाज के लोग हमारे ही हैं… हमें एकजुट होकर अपना घर कब्जा करना होगा।”पारंपरिक वेशभूषा और तीन भाषाओं का ज्ञानसांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की महत्ता बताते हुए, सरसंघचालक ने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि हम अपनी पारंपरिक वेशभूषा, भाषा और रहन-सहन को याद रखें। उन्होंने सलाह दी कि हो सके तो जीवन में हमेशा इसका ध्यान रखें, नहीं तो त्योहारों और विशेष दिनों पर अपना पारंपरिक वेश धारण करना चाहिए।उन्होंने शिक्षा के संबंध में कहा कि हर व्यक्ति को तीन भाषाओं का ज्ञान होना चाहिए: राष्ट्रभाषा, क्षेत्रीय भाषा और स्वयं की भाषा। उन्होंने जोर दिया कि हमें “भारत के स्व एवं स्वयं के स्व को जीवित करना चाहिए।”संत समागम में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थितिलोकार्पण समारोह के बाद एक संत समागम का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर दरबार प्रमुख पुरुषोत्तम दास जी महाराज के साथ कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, सांसद गणेश सिंह और शंकर लालवानी, तथा विधायक भगवान दास साबनानी और अशोक रोहाणी सहित कई साधु-संत और शहर के गणमान्य नागरिक शामिल थे।बाबा मेहर शाह दरबार: आस्था और सद्भाव का केंद्रसतना शहर के दयाल दास चौक स्थित यह दरबार एक पूजनीय धार्मिक स्थल है, जो आध्यात्मिक शांति और सद्भाव का केंद्र माना जाता है। यह स्थान एक मुस्लिम सूफी संत का होने के बावजूद, यहाँ सभी धर्मों के लोग अपनी आस्था के साथ आकर प्रार्थना करते हैं, जो इसे आपसी सौहार्द और भाईचारे का सशक्त प्रतीक बनाता है। दरबार का इतिहास काफी पुराना है और हर साल यहाँ विशेष धार्मिक कार्यक्रम और उर्स का आयोजन किया जाता है।








