कटनी, मध्यप्रदेश।
शहर के सीवर लाइन प्रोजेक्ट ने विकास से ज्यादा संकट खड़ा कर दिया है। ठेका कंपनी की लापरवाही और नगर निगम की चुप्पी ने मिलकर जनता की जान जोखिम में डाल दी है। जिन सड़कों पर कभी रौनक हुआ करती थी, आज वहां मौत के गड्ढे नजर आ रहे हैं — बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के।
📌 सुरक्षा नियम सिर्फ कागजों तक सीमित
सीवर लाइन डालने का काम ठेका कंपनी को सौंपा गया है, जिसमें साफ लिखा गया है कि खुदाई के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा। किन्तु हकीकत इससे कोसों दूर है। न टिन शेड, न रेत की बोरियां, और न ही रेडियम पट्टियां—जो होना चाहिए था, वो कुछ भी जमीन पर नजर नहीं आ रहा।
नगर निगम के इंजीनियरों को काम की नियमित मॉनिटरिंग करनी थी, लेकिन वे भी आंख मूंदे बैठे हैं। नतीजा – हर दिन शहरवासी एक अनजाने खतरे के साए में जीने को मजबूर हैं।
🚨 हादसे का इंतजार कर रही व्यवस्था?
खुले गड्ढे, बिना चेतावनी पट्टियों के खुदी सड़कें, और अंधेरे में डूबे निर्माण स्थल — यह हालात सिर्फ हादसे को दावत नहीं दे रहे, बल्कि जिम्मेदारों की संवेदनहीनता भी उजागर कर रहे हैं।
बच्चों, बुजुर्गों और दुपहिया चालकों के लिए यह हालात बेहद खतरनाक हो गए हैं। कई इलाकों में लोग खुद बैरिकेडिंग कर सुरक्षा का इंतजाम करने को मजबूर हैं।❓ सवालों के घेरे में नगर निगम
शहरवासियों का सवाल है —
👉 जब सुरक्षा शर्तें कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा थीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
👉 इंजीनियर किसकी निगरानी कर रहे हैं — जनता की या ठेका कंपनी की सहूलियतों की?
इस प्रोजेक्ट में हो रही मनमानी और गैर-जिम्मेदारी अब एक खुला घोटाला नजर आ रही है, जहां ना प्रशासन जवाबदेह है और ना ही कंपनी जिम्मेदार।
📣 जनता की मांग – “जवाब चाहिए, राहत नहीं बहाने”
लोगों की एक ही मांग है — सुरक्षा मानकों को तुरंत और सख्ती से लागू किया जाए। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो ये लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है।
कटनी में हो रहा ये निर्माण अब विकास नहीं, विनाश की तस्वीर बनता जा रहा है।
अब देखना यह है कि प्रशासन नींद से कब जागेगा — हादसे से पहले या हादसे के बाद?






