मध्य प्रदेश के कटनी जिले में मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने एक अनोखा और नाटकीय मोड़ ले लिया है। प्रशासन द्वारा लगातार की जा रही अनदेखी से नाराज आंदोलनकारियों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए ‘गांधीगिरी’ और व्यंग्य का सहारा लिया। जब धरना स्थल पर ज्ञापन लेने के लिए कोई भी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा, तो प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक विरोध स्वरूप धरना स्थल पर मौजूद एक कुत्ते को ही अपना ज्ञापन सौंप दिया।क्या है पूरा मामला?कटनी के नागरिक और विभिन्न सामाजिक संगठन लंबे समय से जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि कटनी एक महत्वपूर्ण जंक्शन और बड़ा जिला होने के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में पिछड़ रहा है। इसी मांग को लेकर शहर के हृदय स्थल पर धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया था।अधिकारियों का किया घंटों इंतजारप्रदर्शनकारियों की योजना प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की थी।

आंदोलनकारी धरना स्थल पर बैठकर नारेबाजी करते रहे और उम्मीद करते रहे कि जिला प्रशासन का कोई नुमाइंदा (जैसे एसडीएम या तहसीलदार) उनकी बात सुनने और ज्ञापन लेने आएगा। घंटों इंतजार करने के बाद भी जब कोई अधिकारी वहां नहीं पहुंचा, तो प्रदर्शनकारियों का धैर्य जवाब दे गया।प्रतीकात्मक विरोध और तीखा व्यंग्यअधिकारियों के रवैये से नाराज होकर प्रदर्शनकारियों ने अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने वहां घूम रहे एक श्वान (कुत्ते) को अधिकारियों का प्रतीक मानते हुए उसे ही अपना ज्ञापन सौंप दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।क्या कहा आंदोलनकारियों ने?प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि प्रशासन का रवैया बेहद असंवेदनशील है। उनका तर्क था कि “जब जिम्मेदार अधिकारी जनता की जायज मांग सुनने के लिए समय नहीं निकाल सकते, तो हमने इस बेजुबान जानवर को ज्ञापन देना बेहतर समझा। शायद प्रशासन तक हमारी बात न पहुंचे, लेकिन यह प्रतीकात्मक विरोध उनकी नींद तोड़ने के लिए काफी है।”आंदोलन तेज करने की चेतावनीइस अनोखे प्रदर्शन की पूरे शहर में चर्चा हो रही है। मेडिकल कॉलेज संघर्ष समिति और प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही कटनी को मेडिकल कॉलेज की सौगात नहीं दी और प्रशासन ने अपना अड़ियल रवैया नहीं छोड़ा, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।








