
क्या रोज़ नहाना सेहत के लिए सही है या नहीं? जानिए विज्ञान और एक्सपर्ट्स की रायनई दिल्ली: बचपन से हमें यही सिखाया गया है कि रोज़ नहाना अच्छी आदत है और सेहत के लिए ज़रूरी है। लेकिन क्या हो अगर विज्ञान कहे कि रोज़ नहाना शायद उतना फायदेमंद नहीं है जितना हम सोचते हैं? हाल ही में हुई कई रिसर्च और हेल्थ रिपोर्ट्स ने इस बहस को फिर से छेड़ दिया है कि क्या हमें वाक़ई रोज़ नहाने (Daily Showering) की ज़रूरत है?NDTV और अन्य हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोज़ नहाने के जहाँ कुछ फायदे हैं, वहीं इसके कई नुकसान भी हो सकते हैं। आइए इस खबर को विस्तार से समझते हैं।रोज़ नहाने के नुकसान (Disadvantages of Daily Showering)कई स्किन स्पेशलिस्ट और डर्मेटोलॉजिस्ट का मानना है कि रोज़ नहाना, खासकर गर्म पानी और साबुन से, आपकी त्वचा को नुकसान पहुँचा सकता है। इसके मुख्य नुकसान इस प्रकार हैं:नेचुरल ऑयल का खत्म होना: हमारी त्वचा खुद को सुरक्षित रखने और नमी बनाए रखने के लिए एक ‘नेचुरल ऑयल’ पैदा करती है। रोज़ नहाने से, और ज़्यादा साबुन रगड़ने से यह ज़रूरी तेल धुल जाता है, जिससे त्वचा रूखी (Dry) और बेजान हो सकती है।गुड बैक्टीरिया का सफाया: हमारे शरीर पर अरबों बैक्टीरिया होते हैं, जिनमें से कई ‘गुड बैक्टीरिया’ (Good Bacteria) होते हैं। ये बैक्टीरिया हमारी त्वचा को इन्फेक्शन से बचाते हैं। रोज़ नहाने से ये अच्छे बैक्टीरिया भी मर जाते हैं, जिससे इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) पर असर पड़ सकता है।स्किन इन्फेक्शन का खतरा: जब त्वचा ज़्यादा रूखी हो जाती है, तो उसमें दरारें पड़ सकती हैं। इन दरारों के ज़रिए हानिकारक बैक्टीरिया शरीर में घुस सकते हैं, जिससे स्किन इन्फेक्शन और एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है।बालों को नुकसान: जैसे त्वचा का तेल खत्म होता है, वैसे ही रोज़ बाल धोने से वे भी रूखे और कमज़ोर हो सकते हैं।रोज़ नहाने के फायदे (Advantages of Daily Showering)हालांकि, रोज़ नहाने को पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता। इसके अपने फायदे भी हैं, खासकर भारतीय जलवायु को देखते हुए:सफाई और हाइजीन: भारत जैसे गर्म देश में पसीना और धूल-मिट्टी बहुत होती है। रोज़ नहाने से पसीना, गंदगी और डेड स्किन सेल्स (मृत त्वचा) साफ हो जाते हैं, जिससे रोमछिद्र (Pores) खुले रहते हैं।शरीर की दुर्गंध: पसीने से पैदा होने वाले बैक्टीरिया शरीर में बदबू का कारण बनते हैं। रोज़ नहाने से आप तरोताजा महसूस करते हैं और शरीर से दुर्गंध नहीं आती।मानसिक ताज़गी: सुबह नहाना आपको नींद से जगाने और एक्टिव करने में मदद करता है। वहीं, कुछ लोग दिन भर की थकान मिटाने के लिए शाम को नहाना पसंद करते हैं, जिससे स्ट्रेस कम होता है।रूटीन: कई लोगों के लिए नहाना एक मानसिक संकेत (Signal) है कि उनका दिन शुरू हो चुका है, जिससे वे अपने काम पर बेहतर फोकस कर पाते हैं।एक्सपर्ट्स की सलाह: क्या है सही रास्ता?हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि नहाने की ज़रूरत हर इंसान के लिए अलग-अलग हो सकती है।हफ्ते में 2-3 बार काफी है: अगर आप ऐसी जगह रहते हैं जहाँ ठंड है या आप घर के अंदर (AC में) रहते हैं और आपको ज़्यादा पसीना नहीं आता, तो विज्ञान के अनुसार हफ्ते में 2 से 3 बार नहाना ही काफी है।गर्म पानी से बचें: बहुत तेज़ गर्म पानी से नहाने से त्वचा सबसे ज़्यादा खराब होती है। गुनगुने या सामान्य पानी का इस्तेमाल बेहतर है।साबुन का कम इस्तेमाल: पूरे शरीर पर रोज़ साबुन रगड़ने के बजाय, सिर्फ उन जगहों पर साबुन लगाएँ जहाँ पसीना ज़्यादा आता है (जैसे आर्मपिट्स और ग्रोइन एरिया)। बाकी शरीर को सिर्फ पानी से साफ करना भी पर्याप्त हो सकता है।मॉइस्चराइज़र ज़रूरी है: नहाने के तुरंत बाद जब त्वचा हल्की गीली हो, तब मॉइस्चराइज़र ज़रूर लगाएँ ताकि नमी बनी रहे।निष्कर्षसंक्षेप में, रोज़ नहाना एक सामाजिक आदत ज़्यादा है और मेडिकल ज़रूरत कम। अगर आपको पसीना नहीं आता या आप धूल-मिट्टी में काम नहीं करते, तो रोज़ न नहाने से आपकी सेहत को कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा, बल्कि आपकी त्वचा शायद ज़्यादा स्वस्थ रहेगी।








