
कटनी: मुख्यमंत्री के भूमिपूजन के बाद भी रुका जनपद भवन का निर्माण; निजी जमीन विवाद में घिरे अधिकारी, भाजपा-कांग्रेस ने एक सुर में की जांच की मांगकटनी: मध्य प्रदेश के कटनी जिले में प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां जिस जनपद पंचायत भवन का भूमिपूजन स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था, उसका निर्माण कार्य अब खटाई में पड़ गया है। कारण बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर भवन बनना था, वह सरकारी नहीं बल्कि ‘निजी भूमि’ (Private Land) है।इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्षी कांग्रेस, दोनों ही दलों के नेताओं ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।1. क्या है पूरा मामला?कटनी जनपद पंचायत के नए भवन के निर्माण के लिए एक जमीन चिन्हित की गई थी। प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर मुख्यमंत्री से इसका भूमिपूजन भी करवा दिया। लेकिन, शिलान्यास के कुछ ही समय बाद जब निर्माण कार्य शुरू करने की बारी आई, तो पता चला कि यह जमीन विवादित है और किसी निजी व्यक्ति के नाम पर है।नतीजतन, मुख्यमंत्री के भूमिपूजन के बावजूद मौके पर काम रोक दिया गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन ने भूमिपूजन से पहले राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) की ठीक से जांच नहीं की थी?2. अधिकारियों की घोर लापरवाही उजागरइस घटना ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं:दस्तावेजों की अनदेखी: बिना पुख्ता जांच-पड़ताल के मुख्यमंत्री जैसे वीवीआईपी (VVIP) से भूमिपूजन कैसे करवा दिया गया?सीएम की छवि पर असर: गलत जानकारी देकर मुख्यमंत्री से शिलान्यास करवाना न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि इससे सरकार की छवि भी धूमिल हुई है।संसाधनों की बर्बादी: आयोजन और तैयारियों में लगा सरकारी पैसा और समय बर्बाद हुआ।3. भाजपा और कांग्रेस एक सुर में बोलीं- “दोषियों पर कार्रवाई हो”आमतौर पर एक-दूसरे के विरोध में रहने वाले भाजपा और कांग्रेस के नेता इस मुद्दे पर एकमत नजर आ रहे हैं।भाजपा नेताओं का कहना है: अधिकारियों ने सरकार को गुमराह किया है। यह एक गंभीर चूक है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी गलती न हो।कांग्रेस नेताओं का आरोप: कांग्रेस ने इसे प्रशासन की विफलता बताया है। उनका कहना है कि जब प्रशासन जमीन का सही चयन नहीं कर सकता, तो विकास कार्य कैसे होंगे? उन्होंने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।4. अब आगे क्या?फिलहाल निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप है। प्रशासन अब डैमेज कंट्रोल में जुटा है और जमीन के दस्तावेजों की दोबारा जांच की जा रही है। यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या निर्माण के लिए कोई नई जमीन तलाशी जाएगी या इसी विवाद का कोई कानूनी हल निकाला जाएगा।








