
आंगनवाड़ी में भोजन वितरण में गंभीर लापरवाही: परियोजना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस, सुपरवाइजर की विभागीय जांच के आदेशप्रशासनिक सख्ती: कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई के दिए निर्देश[स्थान, दिनांक]: ज़िले की आंगनवाड़ियों में बच्चों को वितरित किए जा रहे भोजन (रेडी-टू-ईट) की गुणवत्ता और वितरण प्रणाली में घोर अनियमितता पाए जाने पर ज़िला कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया है।
कलेक्टर ने भोजन वितरण की निगरानी में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में परियोजना अधिकारी (Project Officer) को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है।इसके साथ ही, इस पूरी अनियमितता के लिए ज़िम्मेदार माने जा रहे संबंधित सुपरवाइजर के विरुद्ध विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ज़िला प्रशासन बच्चों के पोषण और उनके लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।🔍 क्या है पूरा मामला?प्राप्त जानकारी के अनुसार, आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं के लिए रेडी-टू-ईट (Ready-to-Eat) भोजन का वितरण किया जाता है। हाल ही में किए गए औचक निरीक्षणों और प्राप्त शिकायतों में यह तथ्य सामने आया कि:वितरण में अनियमितता: पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार और समय पर भोजन सामग्री वितरित नहीं की जा रही थी।गुणवत्ता पर संदेह: वितरित सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी प्रश्नचिह्न लगे थे।लापरवाही: परियोजना अधिकारी के क्षेत्र में आने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी और समन्वय में स्पष्ट रूप से शिथिलता (laxity) देखी गई।🎯 कलेक्टर के निर्देश और भावी कार्रवाईकलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे पूरी वितरण व्यवस्था की गहन समीक्षा करें।परियोजना अधिकारी: उन्हें नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है कि क्यों न उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।सुपरवाइजर: सुपरवाइजर पर बच्चों के पोषण जैसे संवेदनशील कार्यक्रम में कर्तव्य की उपेक्षा (Negligence of Duty) का आरोप है। कलेक्टर ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए हैं कि विभागीय जांच तत्काल शुरू कर एक निश्चित समय सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।ज़िला कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कदम उठाए जाएंगे।यह घटना आंगनवाड़ी केंद्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुँच सके। ज़िला प्रशासन अब इस जांच के नतीजों पर पैनी नज़र रखेगा।आंगनवाड़ी में भोजन वितरण में गंभीर लापरवाही: परियोजना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस, सुपरवाइजर की विभागीय जांच के आदेशप्रशासनिक सख्ती: कलेक्टर ने तत्काल कार्रवाई के दिए निर्देश[स्थान, दिनांक]: ज़िले की आंगनवाड़ियों में बच्चों को वितरित किए जा रहे भोजन (रेडी-टू-ईट) की गुणवत्ता और वितरण प्रणाली में घोर अनियमितता पाए जाने पर ज़िला कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर ने भोजन वितरण की निगरानी में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में परियोजना अधिकारी (Project Officer) को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है।इसके साथ ही, इस पूरी अनियमितता के लिए ज़िम्मेदार माने जा रहे संबंधित सुपरवाइजर के विरुद्ध विभागीय जांच (Departmental Inquiry) शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ज़िला प्रशासन बच्चों के पोषण और उनके लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा।🔍 क्या है पूरा मामला?प्राप्त जानकारी के अनुसार, आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं के लिए रेडी-टू-ईट (Ready-to-Eat) भोजन का वितरण किया जाता है। हाल ही में किए गए औचक निरीक्षणों और प्राप्त शिकायतों में यह तथ्य सामने आया कि:वितरण में अनियमितता: पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार और समय पर भोजन सामग्री वितरित नहीं की जा रही थी।गुणवत्ता पर संदेह: वितरित सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी प्रश्नचिह्न लगे थे।लापरवाही: परियोजना अधिकारी के क्षेत्र में आने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों की निगरानी और समन्वय में स्पष्ट रूप से शिथिलता (laxity) देखी गई।🎯 कलेक्टर के निर्देश और भावी कार्रवाईकलेक्टर ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे पूरी वितरण व्यवस्था की गहन समीक्षा करें।परियोजना अधिकारी: उन्हें नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है कि क्यों न उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।सुपरवाइजर: सुपरवाइजर पर बच्चों के पोषण जैसे संवेदनशील कार्यक्रम में कर्तव्य की उपेक्षा (Negligence of Duty) का आरोप है। कलेक्टर ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए हैं कि विभागीय जांच तत्काल शुरू कर एक निश्चित समय सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।ज़िला कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कदम उठाए जाएंगे।यह घटना आंगनवाड़ी केंद्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुँच सके। ज़िला प्रशासन अब इस जांच के नतीजों पर पैनी नज़र रखेगा।








