
⚖️ संजय पाठक की आदिवासी जमीन खरीद मामले में हड़कंप: अनुसूचित जनजाति आयोग ने 4 कलेक्टर्स को भेजा दोबारा नोटिस, 30 दिन में मांगी विस्तृत रिपोर्टभोपाल/जबलपुर: मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री संजय पाठक से जुड़े 1,135 एकड़ आदिवासी जमीन खरीद मामले में अनुसूचित जनजाति आयोग (National Commission for Scheduled Tribes – NCST) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चार जिलों के कलेक्टर्स को दोबारा नोटिस जारी किया है और उन्हें 30 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। यह मामला आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) समुदाय की जमीनों के कथित अवैध अधिग्रहण और खरीद से संबंधित है, जिसके कारण प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर हड़कंप मच गया है।📝 क्या है पूरा मामला?मामला कटनी जिले के विजयराघोगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक संजय पाठक और उनके परिवार द्वारा साल 2007-08 से 2012 के बीच 1,135 एकड़ आदिवासी जमीन खरीदने से जुड़ा है। * यह जमीन कटनी, जबलपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में स्थित है। * आरोप है कि इन जमीनों की खरीद में मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 165(6) का उल्लंघन किया गया है। * यह धारा अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों की जमीन को गैर-आदिवासी को हस्तांतरित करने पर प्रतिबंध लगाती है, या विशेष परिस्थितियों में कलेक्टर की अनुमति को अनिवार्य बनाती है। * आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस खरीद में नियमों को ताक पर रखा गया और आदिवासी किसानों को उचित मुआवजा या न्याय नहीं मिला।🧑⚖️ आयोग की सख़्ती और नया नोटिसराष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इससे पहले भी संबंधित कलेक्टर्स को नोटिस भेजे थे, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अब आयोग ने अंतिम चेतावनी के रूप में दोबारा नोटिस जारी किया है। * किसे भेजा गया नोटिस: कटनी, जबलपुर, मंडला और डिंडोरी के जिला कलेक्टर्स को। * रिपोर्ट की मांग: आयोग ने चारों कलेक्टर्स से जमीन खरीद से संबंधित सभी दस्तावेजों, कलेक्टर की अनुमति (यदि ली गई हो), वर्तमान स्वामित्व की स्थिति, और खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पर एक विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट 30 दिन के भीतर तलब की है। * सख्त निर्देश: आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि इस अवधि में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है, तो इसे आयोग के आदेश की अवमानना माना जाएगा और कलेक्टर्स पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।⏳ प्रशासन पर दबावआयोग के इस नए नोटिस ने इन चार जिलों के प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। यह मामला न सिर्फ कानूनी पेचीदगियों से भरा है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है, क्योंकि इसमें प्रदेश के एक प्रभावशाली नेता का नाम शामिल है। * प्रशासन को अब युद्धस्तर पर पुराने रिकॉर्ड्स खंगालने होंगे और यह जांच करनी होगी कि जमीन हस्तांतरण में कानूनी प्रावधानों का पालन किया गया था या नहीं। * मामले की रिपोर्ट तैयार होने के बाद, अनुसूचित जनजाति आयोग इस पर सुनवाई करेगा और नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर जमीन को मूल आदिवासी मालिकों को वापस करने (Restoration of Land) का निर्देश दे सकता है, जैसा कि अनुसूचित जनजाति आयोग के पास अधिकार है।आगे क्या?अब सभी की निगाहें चारों कलेक्टर्स पर टिकी हैं कि वे अगले 30 दिनों में किस प्रकार की रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। यह रिपोर्ट ही इस 1,135 एकड़ जमीन खरीद मामले के भविष्य की दिशा तय करेगी।








