कटनी। शहर में बढ़ती ट्रैफिक समस्या अब एक गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। मुख्य बाज़ारों से लेकर प्रमुख चौराहों तक हर जगह जाम, अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग ने लोगों का जीवन कठिन बना दिया है।
रोज़मर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही है और प्रशासन की कार्रवाई केवल कागज़ों तक सीमित दिख रही है।शहर के घंटाघर, सर्राफा, मोती टंकी, गौतम चौक और जगन्नाथ चौक जैसे व्यस्त क्षेत्रों में सड़क किनारे फैले अतिक्रमण के कारण सड़कों की चौड़ाई आधी रह जाती है।
दुकानदारों द्वारा सड़क पर सामान फैलाने और ठेला-विक्रेताओं के अनियंत्रित कब्जे से ट्रैफिक जाम आम दृश्य बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजनीतिक दबाव और आंतरिक सांठगांठ के कारण नगर निगम की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अधूरी रह जाती है, जिससे समस्या और बढ़ती जा रही है।कटनी की अधिकतर सड़कें पुरानी और संकरी हैं, जिन्हें वर्षों से चौड़ा नहीं किया गया। बढ़ते वाहनों की संख्या और जनसंख्या के दबाव के बीच इन सड़कों की क्षमता बेहद कम पड़ रही है। कई प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल की अनुपस्थिति से भी यातायात अव्यवस्थित रहता है। मुख्य बाजारों में निर्धारित पार्किंग स्थल या मल्टी-लेवल पार्किंग न होने के कारण लोग सड़क पर ही वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे जाम और बढ़ जाता है।कुछ दिन पहले घंटाघर से जगन्नाथ चौक तक की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई भी ज्यादा समय तक टिक नहीं सकी। दबाव बढ़ते ही अभियान ढीला पड़ गया और सड़कें फिर पहले की तरह संकरी होकर जाम का कारण बनने लगीं। इस वजह से प्रशासन की नीयत और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।ट्रैफिक प्रभारी राहुल पांडे ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए कई सुझाव दिए हैं, जिनमें शहर की संकरी सड़कों का चौड़ीकरण, मल्टी-लेवल पार्किंग का निर्माण, ठेला और सब्जी विक्रेताओं को नियोजित स्थान देना तथा सभी प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाना शामिल है। इसके अलावा, बिना भेदभाव के सख्त और नियमित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की भी आवश्यकता बताई गई है। हालांकि इन सुझावों के लागू होने को लेकर अभी भी संशय बना हुआ है।प्रशासन की ओर से ड्रोन के माध्यम से भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों की निगरानी और कंट्रोल रूम से लगभग 1 किलोमीटर क्षेत्र की गतिविधियों पर नज़र रखने की योजना भी बनाई गई है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैफिक की जड़ समस्या अतिक्रमण है, जिसे केवल निगरानी से नहीं बल्कि वास्तविक, कठोर कार्रवाई से ही समाप्त किया जा सकता है।कटनीवासी रोज़ाना जाम की मार झेलने को मजबूर हैं और प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस बार कड़ा कदम उठाकर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर लाता है या फिर कटनी की जनता इसी अव्यवस्थित यातायात का बोझ उठाती रहेगी।








