
सरकारी आवास खाली न करने पर मध्य प्रदेश के अधिकारियों पर लगेगी तगड़ी पेनल्टीभोपाल। मध्य प्रदेश कैबिनेट ने सरकारी आवासों को लेकर एक कड़ा नया नियम लागू किया है। अब सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) या स्थानांतरण के बाद भी सरकारी आवास को 6 महीने के भीतर खाली नहीं करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से भारी-भरकम किराया और पेनल्टी वसूली जाएगी।नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कैबिनेट के इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘भोपाल स्थित शासकीय आवास आवंटन नियम 2000’ में संशोधन को स्वीकृति दी गई है।नए नियम के मुख्य बिंदु: * अधिकतम अवधि: भोपाल से बाहर स्थानांतरण या सेवानिवृत्त होने की स्थिति में शासकीय सेवक अधिकतम छह माह तक सामान्य दर पर आवास में रह सकेगा। पहले यह अवधि केवल तीन माह थी। * किराया दर: * प्रथम तीन माह: आवंटित आवास का किराया सामान्य दर पर लगेगा। * अगले तीन माह: इस अवधि के लिए किराया सामान्य दर से 10 गुना (दस गुना) दर पर लगेगा। * पेनल्टी और बेदखली: छह माह की अवधि समाप्त होने के बाद भी आवास खाली न करने पर अधिकारी से दाण्डिक दर (पेनल्टी) से किराया वसूला जाएगा, जो कि सामान्य किराए का 30 गुना तक हो सकता है। साथ ही, उसके खिलाफ बेदखली की कार्रवाई भी शुरू की जाएगी। (कुछ स्रोतों में यह पेनल्टी 10 गुना किराए पर 30% अधिभार भी बताया गया है।)सरकार का यह कदम सरकारी आवासों पर अनधिकृत कब्जा बनाए रखने वाले अधिकारियों पर लगाम लगाने और जरूरतमंद नए अधिकारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने में मदद करेगा।








