कटनी। जिले में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में कलेक्टर आशीष तिवारी की अध्यक्षता में वाटरशेड जिला विकास सलाहकार समिति की अहम बैठक हुई। बैठक का फोकस रहा – प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) 2.0 और इसके ज़मीनी असर। बैठक में जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर समेत कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
कलेक्टर ने कहा कि अब वक्त है “कागज़ी योजनाओं को खेतों और घरों तक पहुंचाने का”, ताकि हर किसान और ग्रामीण परिवार को वास्तविक लाभ मिल सके। उन्होंने वाटरशेड योजना से लेकर NRLM तक की परियोजनाओं के अभिसरण (Convergence) का ज़मीनी विश्लेषण करने और ग्रामीणों के जीवन में आए बदलाव को मापने के निर्देश दिए।
चिया की खेती बनेगी ‘कटनी मॉडल’
कलेक्टर ने जिले में क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन और चिया की खेती को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि “चिया अब सिर्फ सुपरफूड नहीं, ग्रामीणों की सुपर इनकम बन सकता है।”NRLM के माध्यम से चिया बीज के लिए स्थायी मार्केटिंग चैनल बनाने के निर्देश दिए गए ताकि किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके।
जल संरक्षण में हाईटेक टेक्नोलॉजी
‘मां की बगिया’ और अन्य जलीय संरचनाओं के निर्माण में अब सिपरी सॉफ्टवेयर के ज़रिए साइट चयन किया जा रहा है। इसका मकसद है – हर बूंद का सही इस्तेमाल और हर खेत तक पानी।
मुर्रा भैंसों से बदले ग्रामीणों की किस्मत
बैठक में बताया गया कि वाटरशेड और NRLM के संयुक्त अभिसरण से अब तक 94 भैंसें स्व-सहायता समूहों के ज़रिए ग्रामीणों तक पहुंचाई जा चुकी हैं।कलेक्टर ने आदेश दिया कि इन भैंसों से हुई आमदनी में वृद्धि और जीवनस्तर में बदलाव का सर्वे कराया जाए। साथ ही, मुर्रा भैंस वाले गांवों को सांची मिल्क रूट से जोड़े जाने के भी निर्देश दिए।
बैठक में रहे शामिल अधिकारी
बैठक में उपसंचालक कृषि डॉ. आर.एन. पटेल, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन वी.ए. सिद्दीकी, सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास वनश्री कुर्वेती, वाटरशेड प्रभारी जिला पंचायत कमलेश सैनी, कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा गौरीशंकर खटीक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।








