
साध्वी बनने निकली नाबालिग छात्रा को पुलिस ने रोका, काउंसलिंग के बाद परिवार से मिलाया:खंडवा/भोपाल: धार्मिक प्रवचनों और भगवान शिव की भक्ति से अत्यधिक प्रभावित एक नाबालिग नर्सिंग छात्रा ने अध्यात्म की तलाश में घर छोड़ दिया और साध्वी बनने के लिए काशी जाने का निर्णय लिया। 19 अक्टूबर की सुबह छात्रा ने घर पर एक भावनात्मक पत्र छोड़ा जिसमें उसने लिखा था कि वह प्रभु को अपना जीवन समर्पित करना चाहती है और उसे खोजने का प्रयास न किया जाए।घर से निकलने से पहले, छात्रा ने अपने शहर के शिव मंदिर में भगवान शिव से प्रतीकात्मक विवाह किया, उन्हें माला और मंगलसूत्र अर्पित कर अपना जीवनसाथी माना। इसके बाद वह साध्वी की वेशभूषा धारण कर काशी जाने के उद्देश्य से हैदराबाद-जयपुर एक्सप्रेस में सवार हो गई।पुलिस की सजगता से टली बड़ी भूल:ट्रेन में अकेले यात्रा कर रही साध्वी रूपी छात्रा पर यात्रियों और आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल) कर्मियों की नजर पड़ी। पूछताछ करने पर, छात्रा ने मासूमियत से बताया कि वह साध्वी बनने के लिए काशी जा रही है। आरपीएफ कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे प्यार से समझाया कि वह गलत ट्रेन में बैठ गई है और उसे तुरंत बाल कल्याण समिति (CWC) खंडवा के समक्ष प्रस्तुत किया।गहन काउंसलिंग और मानवीय दृष्टिकोण:न्यायिक मजिस्ट्रेट समकक्ष खंडपीठ, बाल कल्याण समिति खंडवा के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में समिति ने इस मामले को अत्यंत संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण से संभाला। समिति सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, कविता पटेल और स्वप्निल जैन की उपस्थिति में बालिका की गहन काउंसलिंग की गई।काउंसलिंग के दौरान, छात्रा ने बताया कि वह लंबे समय से धार्मिक वीडियो, साध्वियों के प्रवचन और भगवान शिव की भक्ति से प्रभावित थी, जिसके कारण उसने अध्यात्म और शांति की खोज में साध्वी जीवन अपनाने का निर्णय लिया था।अध्यक्ष ने दिया आध्यात्मिक मार्गदर्शन:अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने करुणा के साथ छात्रा को समझाया कि सच्ची आध्यात्मिकता का अर्थ जीवन से पलायन नहीं, बल्कि शिक्षा, सेवा और समाज में सकारात्मकता फैलाने से ईश्वर की प्राप्ति है। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल साध्वी बनकर ही नहीं जिया जा सकती, बल्कि यह समाज में प्रेम, नैतिकता और सद्भाव फैलाने का माध्यम बन सकती है। उन्होंने छात्रा को अपनी पढ़ाई पूरी करने और भविष्य में कथावाचक बनकर अपने ज्ञान व श्रद्धा से लोगों को प्रेरित करने का सुझाव दिया, जिसे उन्होंने “सच्चा साध्वी जीवन” बताया। छात्रा ने इस मार्गदर्शन को स्वीकार करते हुए अपनी शिक्षा जारी रखने का संकल्प लिया।बिगड़ी मां की तबीयत, समिति ने जोड़ा परिवार:छात्रा के अचानक घर छोड़ने की खबर से उसकी मां की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में समिति ने तत्परता से परिजनों से संपर्क कर उन्हें स्थिति से अवगत कराया। परिवार ने बालिका को सुरक्षित पाकर राहत की सांस ली। समिति ने परिजनों को खंडवा बुलवाकर बालिका को उनके सुपुर्द कर दिया और उन्हें सलाह दी कि वे उसकी आध्यात्मिक जिज्ञासाओं का सम्मान करते हुए उचित मार्गदर्शन प्रदान करें।








