
‘बहाना नहीं चलेगा’: बीमा क्लेम निरस्त करने पर उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को लगाई फटकार, 11.25 लाख रु. देने का आदेशभोपाल। व्यक्तिगत बीमा क्लेम को मामूली तकनीकी आधार पर निरस्त करने वाली बीमा कंपनियों को भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग ने कड़ा संदेश दिया है। आयोग ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मुसीबत के समय बहाना नहीं चलेगा, बीमा कंपनी को दावे का भुगतान करना ही होगा, हालाँकि बीमित की गलती के लिए कुछ राशि काटी जा सकती है।ऑटो ड्राइवर की मृत्यु पर क्लेम किया था निरस्तमामला अमरावद खुर्द निवासी अनीता चौहान से संबंधित है, जिन्होंने लिबर्टी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अनीता के पति सुरजीत सिंह ऑटो चालक थे, जिनका व्यक्तिगत बीमा था। वर्ष 2021 में भोपाल से विदिशा जाते समय बालमपुर घाटी के पास मिनी ट्रक की टक्कर से उनकी मौत हो गई थी।बीमा कंपनी ने दुर्घटना बीमा दावा इस आधार पर निरस्त कर दिया कि ऑटो का परिचालन ‘परमिट रूट से अलग’ किया जा रहा था। कंपनी का तर्क था कि वाहन का अस्थायी परमिट केवल भोपाल नगर निगम सीमा तक था, जबकि चालक यात्रियों को नगर निगम क्षेत्र से बाहर बालमपुर घाटी ले गया, जो पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन है।आयोग ने माना सुप्रीम कोर्ट का सिद्धांतजिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के तर्क को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। आयोग ने पाया कि मृतक के पास ड्राइविंग लाइसेंस सहित सभी दस्तावेज सही थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना के समय परमिट क्षेत्र से बाहर होना पॉलिसी की ‘मूलभूत शर्तों का उल्लंघन’ नहीं है।आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक समान मामले में दिए गए निर्णय को आधार बनाया। इस निर्णय के अनुसार, ऐसे मामलों में बीमा धन का 75 प्रतिशत भुगतान ‘नॉन स्टैंडर्ड’ के आधार पर किया जाना चाहिए।कंपनी को देना होगा 11.25 लाख रुपयेउपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह बीमा दावे की कुल राशि 15 लाख रुपये का 75 प्रतिशत यानी 11.25 लाख रुपये का भुगतान करे। इसके अतिरिक्त, कंपनी को याचिकाकर्ता को 13 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति राशि के तौर पर भी देने का आदेश दिया गया है।उपभोक्ता की अधिवक्ता मोना पालीवाल ने बताया कि बीमा कंपनी ने परमिट क्षेत्र का उल्लंघन बताकर क्लेम निरस्त किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को आधार बनाकर आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।








