
मध्यप्रदेश के 12 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को नहीं मिली मान्यता, NSUI ने लगाया गंभीर आरोपमध्यप्रदेश में नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश के 12 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को अभी तक मान्यता नहीं मिल पाई है, जिससे हजारों छात्राओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है। एनएसयूआई (NSUI) ने इसके लिए राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और निजी कॉलेजों से सांठगांठ का आरोप लगाया है।शैक्षणिक ढांचे की कमी और अनियमितताएँएनएसयूआई का कहना है कि इन कॉलेजों में शैक्षणिक ढांचे की भारी कमी है। राज्य सरकार की गाइडलाइन के बावजूद इन संस्थानों ने न तो जरूरी फैकल्टी की नियुक्ति की और न ही आवश्यक सुविधाओं को पूरा किया। * फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आई हैं। * कई कॉलेजों में प्राचार्य और उप प्राचार्य तक नहीं हैं, जबकि कुछ केवल एक या दो फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं। * अगस्त 2025 में एनएसयूआई द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।मंत्री और नेताओं के गृह जिलों के कॉलेज भी वंचितमान्यता से वंचित रहने वाले 12 कॉलेजों में रायसेन, मंदसौर, नरसिंहपुर, जबलपुर, सागर, खंडवा, अमरकंटक, भोपाल, झाबुआ, सीधी, राजगढ़ और दतिया के कॉलेज शामिल हैं।एनएसयूआई ने आरोप लगाया है कि इनमें से कई कॉलेज राज्य सरकार के 13 मंत्रियों और भाजपा नेताओं के गृह जिलों में हैं, फिर भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।गरीब छात्राओं का भविष्य अधर मेंइन कॉलेजों की मान्यता रुकने से करीब 1000 से ज्यादा सीटें खाली रह जाने का खतरा है। एनएसयूआई ने चिंता व्यक्त की है कि जो गरीब छात्राएं निजी कॉलेजों की ऊंची फीस नहीं भर सकतीं, वे अब नर्सिंग प्रवेश से वंचित रह जाएंगी।संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकारी कॉलेजों की मान्यता को रोकना प्राइवेट नर्सिंग कॉलेजों को फायदा पहुंचाने की एक सुनियोजित रणनीति है, जिसमें विभाग के कुछ अधिकारी निजी संस्थानों से मिलीभगत कर रहे हैं।NSUI ने दी आंदोलन की चेतावनीएनएसयूआई का कहना है कि सरकार की इस लापरवाही से गरीब परिवारों की बेटियां नर्सिंग की पढ़ाई से वंचित हो रही हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही इन कॉलेजों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और मान्यता प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो एनएसयूआई प्रदेशभर में आंदोलन करेगी। साथ ही, कुछ कॉलेजों द्वारा इतनी खामियों के बावजूद एम.एससी. नर्सिंग की 35 सीटों के लिए आवेदन करना भी नर्सिंग शिक्षा के साथ ‘खिलवाड़’ बताया गया है।








