कटनी में 194.4 करोड़ रुपए की लागत से बने 19 किलोमीटर लंबे बाईपास पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा कटनी के पीरबाबा से चाका तक निर्मित बाईपास की स्थिति जर्जर है। इस बाईपास का उद्देश्य शहर को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाना और यात्रियों को सुरक्षित व सुगम यात्रा प्रदान करना था, लेकिन अब यह परियोजना अपने मुख्य उद्देश्य में विफल होती दिख रही है। आए दिन सड़क हादसों का कारण बन रही है।
बाईपास पर अंधेरा यात्रियों के लिए बन रहा खतरा
बाईपास पर सबसे बड़ी समस्या चारों ओर पसरा अंधेरा है। यात्रियों की सुविधा के लिए पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए थी, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। बाईपास से बिजली के ट्रांसफॉर्मर गायब हैं और कई बिजली के खंभों में कनेक्शन ही नहीं किए गए हैं। इस वजह से रात के समय यह बाईपास पूरी तरह से अंधेरे में डूब जाता है। इससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है और सड़क हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
भष्ट्राचार और लापरवाही से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
स्थानीय कांग्रेस नेता दिव्यांशु मिश्रा ने इसे ठेकेदार एजेंसी श्रीजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ भ्रष्टाचार बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाईपास की सर्विस रोड भी पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह गड्ढे और खराब निर्माण सामग्री की वजह से यह सड़क छोटे-बड़े वाहनों के लिए मुसीबत बन गई है। जो निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है।
लापरवाही का आलम यह है कि बाईपास के बीचों-बीच से 33 केवी की हाई टेंशन लाइन गुजर रही है। नियमानुसार, दुर्घटनाओं से बचने के लिए इस लाइन को भूमिगत किया जाना चाहिए था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस नियम की पूरी तरह से अनदेखी की है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।







